मुझे पता भी था के लोग 🙂 बदल जाते हैं…!!मगर मैंने कभी 🦋 तुझे लोगो में गीना भी नहीं था…!!

अकेला 🙂 था किसे आवाज़ देता….
उतरती रात से 🦋 तन्हा लड़ा मैं….

सच कहा था 🙂 एक फ़क़ीर ने मुझसे!!
तुझे यार तो मिलेगा 🦋 सिर्फ़ तड़पाने के लिए!!

रूह तक अपनी 😎 बात ,,,पहुंचाने का दम रखते हैं…
शायर है 🙂 हम ,,,सीधा दिल 💖 में कदम रखते हैं…

जो नफरत 🙂उसको दिखाई थी कुछ यूँ बेकार हो गई।
जुबान मेरे बस 😎 में रहीं,और आँखे गद्दार 💖 हो गई।

भीगी नहीं थी 😎 मेरी आँखें,,कभी वक्त के मार से,देख 💖 आज तेरी थोड़ी सी बेरुखी ने,इन्हें जी 🦋 भर के रूला दिया….

तू वजह 🙂 सी है जीने कीतो हवाओं का 💖 रास्ता क्या है !दर्द तुझसे और इलाज भी है तूफिर दवाओं 🦋 का वास्ता क्या है!!

ज़ुबां को 🙂 रोको तो आँखों में झलक आता है
ये जज़्बा-ए-इश्क 💗 है जनाब इसे सब्र कहाँ आता है।

मोहल्ले की 💗 मोहब्बत का भी अजीब फ़साना है !चार घर की दूरी हैऔऱ बीच 🦋 मे सारा जमाना हें !

उम्र ज़ाया 🙂 कर दी लोगों नेऔरों के वजूद में नुक़्स 😬 निकालते – निकालते।
इतना ही खुद 😎 को तराशा होतातो फ़रिश्ते 🦋 बन जाते।

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