उसकी याद आई है साँसों जरा अहिस्ता चलो,
धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ता है।

नहीं है कुछ भी मेरे दिल में सिवा उसके,
मैं उसे अगर भुला दूँ तो याद क्या रखूँ।

तुझे याद कर लूं तो मिल जाता है सुकून,
मेरे गमों का इलाज भी कितना सस्ता है।

मैं उसको भूल गया हूँ यह कौन मानेगा,
किसी चिराग के बस में धुआँ नहीं होता।

ये रस्म-ए-उल्फ़त इजाज़त नहीं देती वरना,
हम तुम्हे ऐसे भूलेंगे कि तुम सदा रखोगे।

कहेगा झूठ वो हमसे तुम्हारी याद आती है,
कोई है मुन्तजिर कितना ये लहजे बोल देते हैं।

कुछ खूबसूरत पलों की महक सी हैं तेरी यादें,
सुकून ये भी है कि ये कभी मुरझाती नहीं।

अहसास मिटा,तलाश मिटी,मिट गई उम्मीदें भी,
सब मिट गया पर जो न मिट सका वो है यादें तेरी।

फिर तेरी याद,फिर तेरी तलब, फिर तेरी बातें,
ऐसे लगता है ऐ दिल मेरे तुझे सकून नहीं आता।

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