फासले इस कदर हैं ✧ आजकल रिश्तों में ✧ जैसे कोई घर खरीदा हो ✧ किश्तों में ✧

तुम्हारी आँख के आँसू ✧ हमारी आँख से निकले ✧ तुम्हे फिर भी ✧ शिकायत है ✧ मोहब्बत हम नहीं करते ✧

शीशा कमज़ोर बहुत होता है मगर✧ सच दिखने से घबराता नहीं है ✧

जिसके साथ तसव्वुर था ✧ जन्नत तक का ✧ वो शख्स ✧ दुनिया जहन्नम कर गया ✧…

रोज़ देखती है आईने में ✧ एक नई सूरत ✧ कपडे कम खुद को ज़्यादा ✧ बदला है इस साल मैंने ✧

ग़जब की धूप है ✧ शहर में मगर ✧ दिल किसी का भी ✧ पिघलते नहीं देखा मैंने ✧.

तुम काली स्याही से लिखो ✧ या लाल स्याही से ✧ कुछ यादें ✧ हमेशा हरी ही रहती हैं ✧

पानी से भरी आँखें लेकर ✧ वो मुझे घूरता ही रहा ✧ आईने में खड़ा शख्स ✧ परेशां बहुत था ✧

सब से कहती हूं कि ✧ तेरा इंतज़ार नहीं ✧ पर हर शाम सोचती हूँ की ✧ तू अब तक आया क्यों नहीं ✧

आज एक ख्वाब ने ✧ मुझसे पूछा ✧ पूरा करोगे या ✧ टूट जाऊ ✧

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