मैं आईनों से मायूस लौट आया था,
मगर किसी ने बताया बहोत हसीन हूँ मैं। 

कहते थे तुझको लोग मसीहा मग़र  यहां,
एक शख्स मर गया तुझे देखने के बाद।

वो एक शख्स समझता था मुझे,
फिर वो भी समझदार हो गया।

ख़्वाहिश-ए ज़िंदगी बस इतनी सी  है अब हमारी,की तेरा साथ हो और ज़िन्दगी कभी ख़त्म न हो।

मैं हूँ और साथ तेरी बिखरी हुई यादें हैं,क्या इसी चीज़ को कहते हैं गुज़ारा होना।वो मेरे बाद भी खुश होगा किसी और के साथ,मीठे चश्मों को कहाँ आता है खरा होना। 

कुछ मजबूरियां हैं वरना,
कहाँ रहा जाता है तेरे बिन।

दिल की जिद हो तुम वरना,
इन आँखों ने बहुत लोग देखे हैं।

तुमने देखा ही नहीं हमसे बनाके वरना,
तुम्हे वो मक़ाम देते की ज़माना देखता।

किसी दिन हम न होंगे,
और हमारी मुस्कुराती तस्वीर रह जाएगी।

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