इश्क़ की तलाश मेंक्यों निकलते हो तुम,इश्क़ खुद तलाश लेता हैजिसे बर्बाद करना होता है।

तुझ से बिछड़ कर कब ये हुआ कि मर गए,
तेरे दिन भी गुजर गएऔर मेरे दिन भी गुजर गए.

वो शख़्स जो कभीमेरा था ही नही,
उसने मुझे किसी और का भीनही होने दिया.

सालों बाद मिले वोगले लगाकर रोने लगे,
जाते वक्त जिसने कहा थातुम्हारे जैसे हज़ार मिलेंगे.

जब भी आंखों में अश्क भर आए लोग कुछ डूबते नजर आए
चांद जितने भी गुम हुए शब केसब के इल्ज़ाम मेरे सर आए

जिन दिनों आप रहते थे,
आंख में धूप रहती थी
अब तो जाले ही जाले हैं,
ये भी जाने ही वाले हैं.

जबसे तुम्हारे नाम की मिसरी होंठ लगाई है मीठा सा गम है,और मीठी सी तन्हाई है.

वक्त कटता भी नही वक्त रुकता भी नही
दिल है सजदे में मगर इश्क झुकता भी नही

होती नही ये मगर
हो जाये ऐसा अगर
तू ही नज़र आए तू
जब भी उठे ये नज़र

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