ज़िन्दगी तुहि बता कैसे तूझे प्यार करूं तेरी हर एक सुबह मुझे अपनों से दूरी का एहसास देती है

वो लोग आते क्यू है ज़िन्दगी में हमारे जिसे बिछड़ना होता जिन को किसी बहाने से

खुशी मिली है न सके गम मिला तो रो न सके ज़िन्दगी का यही दस्तूर है जिसे चाहा उसे पा न सके और जिसे पाया उसे चाह न सके

यूँ ज़िन्दगी में ऐसा ही क्यों होता है जिससे हम बहुत प्यार करते है ज़िन्दगी उसे हमसे बहुत दूर कर देती है

ज़िन्दगी की हर तमन्ना पूरी नहीं होती तक़दीर की कोई भी मजबोरी नै होती

गलत किया जो तेरे वादे पे एतबार किया सारी जिंदगी तेरे आने का इंतज़ार किया

अगर मोहब्बत नही थी तो बता दिया होता तेरे एक चुप ने मेरी ज़िन्दगी तबाह कर दी

लुटा दी हमने अपना सब हासिल-ज़िन्दगी सिकंदर से फ़क़ीर हुए एक यार की खातिर

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