मशहूर हो जाते हैं वो जिनकी हस्ती बदनाम होती है, कट जाती है जिंदगी सफ़र में अक्सर जिनकी मंजिलें गुमनाम होती हैं

सैर कर दुनीया की गालिब, जिन्दगानी फिर कहा, जिन्दगानी गर रही तो, नौजवानी फिर कहा!

मुझे ख़बर थी मेरा इन्तजार घर में रहा,
ये हादसा था कि मैं उम्र भर सफ़र में रहा…

चले थे जिस की तरफ़ वो निशान ख़त्म हुआ सफ़र अधूरा रहा आसमान ख़त्म हुआ…

एक सफ़र वो है जिस में पाँव नहीं दिल दुखता है

इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई हम न सोए रात थक कर सो गई

किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा

मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा.

दिल से मांगी जाए तो हर दुआ में असर होता है, मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनकी जिंदगी में सफ़र होता है.

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