” मोहब्बत ” करने वाले आशिक कम ना होंगे
पर तेरी महफिल मे हम ना होंगे

कुछ जख्म सदियों बाद तक भी ताजा रहते हैं
वक़्त के पास भी हर मर्ज़ का इलाज नहीं होता

DIL को छोड़कर कुछ और मांग ले
हमारे यहाँ टूटी हुई चीज देने का रिवाज नहीं

एक तुम ही न मिल सके वरना…
 मिलने वाले तोबिछड़ बिछड़ के मिले।

कुछ लोग पसंद करने लगे हैं अल्फाज मेरे, मतलब मोहब्बत में बरबाद और भी हुए हैं।

तेरी हालत से लगता है तेरा अपना था कोई, इतनी सादगी से बरबाद कोई गैर नहीं करता।

कुछ इस अदा से तोड़े है ताल्लुक उसने,
एक मुद्दत से ढूंढ़ रहा हूँ कसूर अपना।

तेरे हुस्न पे तारीफों भरी किताब लिख देता,
काश… तेरी वफ़ा तेरे हुस्न के बराबर होती।

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